
वेट लिफ्टिंग के क्षेत्र में नित नये कीर्तिमान स्थापित करने वाली 21 वर्षीया ग्रामीण बाला निधि सिंह पटेल का तो यही कहना है कि प्रदेश एवं केन्द्र सरकार के पास उसकी सहायता करने के लिए एक रूपया भी नहीं है। यदि स्थानीय जे0पी0 सीमेन्ट फैक्ट्री और शहर के कुछ गणमान्य उसकी मददगार न होते तो उसकी प्रतिभा कब की गुमनामियों के अंधेरे में दम तोड़ चुकी होती।
इंग्लैण्ड की राजधानी लंदन में 15 से 19 दिसम्बर तक आयोजित कामनवेल्थ पावर लिफ्टिंग प्रतियोगिता में भारतीय टीम की महिला वर्ग में उ0प्र0 के मीरजापुर जनपद के चुनार थानान्र्तगत पचेवरा गांव निवासी मध्यम वर्गीय गिरिजा शंकर सिंह पटेल की 21 वर्षीय बेटी एम0ए0 की छात्रा निधि सिंह पटेल अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित 5 दिवसीय इस प्रतियोगिता में भाग लेकर एक-एक कर कुल पाँच स्वर्ण पदक अपने नाम कर एक कीर्तिमान स्थापित किया। पाँच गोल्ड मेडल के साथ गुरूवार 22 दिसम्बर, 2011 को निधि जब अपने शहर मीरजापुर लौटी तो एक ओर जहाँ उसके मुख मण्डल पर पदक जीतने की खुशी थी वहीं सरकार द्वारा हो रही उपेक्षा उसे अन्दर से पीड़ा पहुँचा रही थी।
युवा वेट लिफ्टिर निधि सिंह पटेल महज 30 माह के अपने खेल कैरियर में जो मुकान हासिल किया वह उसकी लगन और कड़ी मेहनत का ही परिणाम है। वैसे निधि पटेल अपनी इस सफलता का श्रेय अपने कोच कमलापति त्रिपाठी को देती है जिनके कुशल दिशा-निर्देशन में सुबह-शाम के कठिन अभ्यास ने उसे इस मुकाम तक पहुँचाया। तीसरी बार देश से बाहर लंदन में आयोजित बेंच प्रेस एवं कामनवेल्थ पावर लिफ्टिंग प्रतियोगिता में भाग लेकर निधि ने अपनी प्रतिभा की जो धाक जमाई उससे मीरजापुर जनपद ही नहीं बल्कि पूरा पूर्वांचालवासी अपने को गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
उत्तर-प्रदेश समेत देश के दूसरे राज्यों में आयोजित पावर लिफ्टिंग प्रतियोगिता में जहाँ कहीं भी निधि को भाग लेने का अवसर मिला वहाँ उसने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए कोई न कोई पदक जरूर हासिल किया। ऐसे लगभग दो दर्जन से अधिक पदक और प्रशस्ति पत्र तथा गोल्ड व रजत मेडल अपने नाम कर चुकी निधि को उस समय अपार खुशी मिली जब पहली बार देश से बाहर फिलीपींस की राजधानी मनीला में 14 अगस्त, 2010 को आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय बंेच प्रेस चैंपियनशिप प्रतियोगिता में भाग लेकर 52 किलो भार वर्ग में 70 किलो वजन उठाकर रजत पदक हासिल कर शहर लौटी तो जगह-जगह निधि के स्वागत में सम्मान समारोह का आयोजन हुआ।

निधि की मनीला यात्रा चंदे द्वारा जुटाई गयी रकम की बदौलत संभव हुई। मनीला जाकर प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए निधि को पौनें दो लाख रूपये की आवश्यकता थी। पिता की माली हालत काफी जर्जर है, 6 सदस्यीय परिवार में निधि को दोनों वक्त का भरपेट खाना खिला देते है यही बहुत था। कोच कमलापति त्रिपाठी ने निधि का हौसला बढ़ाया और कहा कि भले ही उनको इसके लिए लोगों से चंदा माँगना पड़े, मांगेंगे परन्तु निधि को मनीला जरूर भेजेंगे। यही किया भी, लगभग एक दर्जन गणमान्य लोगों और समाजसेवियों से चंदा मांगकर लगभग 2 लाख रूपये की धनराशि इकठ्ठा की जिसमें सबसे बड़ी धनराशि एक लाख रूपये स्थानीय चुनार सीमेन्ट फैक्ट्री की ओर से मिला और 30 हजार रूपये जिले के स्वजातीय सपा सांसद बाल कुमार पटेल ने दिया। परन्तु तमाम प्रयासों के बावजूद जिला प्रशासन स्तर एवं प्रदेश सरकार से निधि को एक रूपये की भी सहायता राशि नहीं मिली।
मनीला से विजयी होकर लौटने के बाद उसकी काफी परेशानियों का हल हो गया। निधि को प्रोत्साहित करने के लिए चुनार सीमेण्ट फैक्ट्री ने उसे गोद ले लिया और एलान किया कि निधि के खान-पान (फिटनेश) के लिए कम्पनी की ओर से प्रतिमाह उसे 10 हजार रूपये दिये जायेंगे तथा 15 हजार रूपये प्रतिमाह उसके खाते में कम्पनी जमा करेगी। यह रकम निधि को बाहर जाकर खेलने के समय काम आयेगी। मनीला से लौटने के बाद प्रदेश एवं देश स्तर पर आयोजित वेट लिफ्टिंग प्रतियोगिताओं में भाग लेकर निधि ने अपनी काबलियत को बरकरार रखा और तमाम मेडलों के साथ ’स्ट्रांग वुमेन आफ इण्डिया’ का खिताब भी अपने नाम किया। दूसरी बार देश से बाहर चीन के ताइवान शहर में आयोजित 6 दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय पावर लिफ्टिंग बेंच प्रेस प्रतियोगिता में निधि को भाग लेने का मौका मिला। इस प्रतियोगिता में पूरे भारत से 22 पुरूष और 15 महिला वेट लिफ्टिरों ने भाग लिया, जिसमें उत्तर प्रदेश से एकमात्र निधि पटेल की भागीदारी रही। विपरीत परिस्थितियों में भी निधि 13 अगस्त, 2011 को 57 किलोभार वर्ग में 77 किलो वजन उठाकर कांस्यपदक पर कब्जा जमाया।
ताइवान से लौटने के बाद भी निधि का जलवा बरकरार रहा और उसका चयन दिसम्बर, 2011 में लंदन में आयोजित कामनवेल्थ पावर लिफ्टिंग प्रतियोगिता के लिए हो गया। निधि दिल्ली से 13 दिसम्बर को लंदन के लिए उड़ान भरी और वहाँ पहुँचकर एक-एक कर 5 स्वर्ण पदक अपनी झोली में डाले। लंदन में रिकार्ड बनाने के बाद निधि पटेल 22 दिसम्बर, 2011 को अपने शहर मीरजापुर लौटी तब हमारे संवाददाता ने निधि से बात की तो उसके दिल की पीड़ा जुबान पर आ ही गयी। उसने बताया कि उसका परिवार बेहद गरीब है आज भी वह खपरैल के कच्चे मकान में रहती है। पहली बार मनीला, दूसरी बार ताइवान और तीसरी बार लंदन में आयोजित प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रदेश एवं देश का गौरव बढ़ाया। तीनों बार उसके सामने आर्थिक समस्यायें राह रोककर खड़ी हो गयी। ऐसे में चुनार जे0पी0 सीमेन्ट फैक्ट्री ने उसकी भरपूर मदद की इसके अलावा दूसरों से भी मदद मांगनी पड़ी। लंदन जाने के लिए उसे दो लाख रूपयों की जरूरत थी। एक लाख की सहायता सीमेन्ट फैक्ट्री के वाइस प्रेसीडेंट बिग्र्रेडियर आर0आर0 बाली ने तुरन्त उपलब्ध करा दी। चालीस हजार की मदद भाजपा विधान मण्डल दल के नेता चुनार के स्थानीय विधायक ओम प्रकाश सिंह के पुत्र अनुराग सिंह ने दिया। इसके बावजूद उसे लगभग 40 हजार की कमी पड़ रही थी जिसके लिए कोच श्री त्रिपाठी के साथ वह स्वयं मीरजापुर जिलाधिकारी श्रीमती संयुक्ता समद्दार से मिलकर बात की तो आश्वासन भी मिला कि मदद की जायेगी परन्तु ऐन मौके पर प्रशासन ने अपने हाथ खड़े कर दिये।

निधि को इस बात का भी मलाल है कि विदेशों में जहाँ कहीं भी खेलने के लिए पहुँची वहाँ उसके प्रतिद्वन्दी प्रतिभागियों की परेशानियों और दिक्कतों को दूर करने के लिए उनके राष्ट्र के विदेशी दूतावास से सम्बद्ध कोई न कोई अधिकारी प्रतियोगिता स्थल पर जरूर मौजूद दिखा, पर उसके साथ ऐसा कभी नहीं हुआ कि कोई अधिकारी वहाँ रहा हो और मेरी किसी परेशानी को समझा हो। दोनों बार की तरह लंदन में भी मेरे सामने कई विषम परिस्थितियाँ आयी, पहला लंदन का तापमान शून्य से नीचे था दूसरा शाकाहारी भोजन ठीक ढंग से नहीं मिल रहा था। विदित हो निधि शुरू से शाकाहारी है इसके बावजूद उसने मांसाहारी वेट लिफ्टिंरों के समक्ष दूध-घी की धाक जमा दी। तीनों बार पदक जीतकर जब वह विदेश से वापस मीरजापुर रेलवे स्टेशन पर कदम रखे तो उसके स्वागत में जहाँ सैकड़ों की भीड़ मौजूद थी वहीं पर प्रशासनिक स्तर पर कभी कोई छोटा सा अधिकारी भी मौजूद नहीं रहा।
बीते 14 नवम्बर को दिल्ली स्थित मेजर ध्यानचन्द स्टेडियम में आयोजित खिलाडि़यों के एक सम्मान समारोह में केन्द्रीय खेल मंत्री अजय माकन ने वर्ष 2009 से 2011 तक अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेकर स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाडि़यों एवं और उनके कोचो को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इस सम्मान समारोह में 8 करोड़ रूपये की राशि 130 खिलाडि़यों और 132 कोचों के बीच में बाँटा गया। एक ओर जहाँ इतनी बड़ी संख्या में खिलाडि़यों को नकद पुरस्कार दिया गया वहीं निधि के लिए सरकारी स्तर पर अभी तक एक रूपये की भी मदद न मिलना समझ से परे है। एक महिला मुख्यमंत्री के राज में एक महिला खिलाड़ी वह भी गवई परिवेश में पली-बढ़ी वेट लिफ्टर निधि पटेल की ऐसी उपेक्षा समझ से परे है।