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शनिवार, 17 मार्च 2018

परमवीर चक्र विजेता सूबेदार जोगिंदर सिंह की बायोपिक 6 अप्रैल से देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी!

♦ फिल्म के धमाकेदार ट्रेलर से दर्शकों की उम्मीदें बढ़ीं

मुम्बई : परमवीर चक्र विजेता सूबेदार जोगिंदर सिंह की बायोपिक 6 अप्रैल से देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। ये जानकारी फिल्म के डायरेक्टर समरजीत सिंह ने दी। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत - चीन युद्ध के दौरान 1962 में चीनी हमलों का मुंहतोड़ जवाब देने वाले बहादुर सिपाही की बायोपिक सूबेदार जोगिंदर सिंह ने फिर से साबित कर दिया है कि यह फिल्म बेहतर तरीके से और बढ़िया सिनेमाटिक्स के जरिये लोगों को उस समय के हालातों से अवगत कराती है। 21 वीं सदी के आगमन के साथ, फिल्म मेकिंग में जबरदस्त परिवर्तन आया है। आजकल युवाओं का रुझान काल्पनिक सिनेमा की तरफ अधिक है।

उन्होंने कहा कि आज कल युवाओं का रुझान काल्पनिक सिनेमा की तरफ अधिक है। हमारे देश में चारों तरफ समृद्ध संस्कृति, विरासत, ऐतिहासिक घटनाएं और किस्से हैं। उस नजरिये से देखें तो हमारे पास दर्शकों को दिखाने और उन्हें देने के लिए बहुत कुछ है। फिल्म निर्माताओं को सिनेमा की शक्ति का उपयोग एक सकारात्मक संदेश देने, अच्छे विचार साझा करने और दर्शकों तक वास्तविक और प्रेरणादायक कहानियां पहुंचाने के लिए करना चाहिए। वो घटनाएं और गाथाएं, जिनके बारे में ज्यादातर लोग अनजान हैं।

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता राशीद रंगरेज द्वारा लिखित, सिमरजीत सिंह द्वारा निर्देशित और सुमीत सिंह द्वारा तैयार की गई फिल्म सूबेदार जोगिंदर सिंह में पहाड़ की दुर्गम चोटियों पर सूबेदार जोगिंदर सिंह के रूप में अभिनेता गिप्पी ग्रेवाल अपनी पलटन के साथ नजर आ रहे हैं। यह देश की पहली ऐसी जीवनी हैं जो किसी परमवीर चक्र विजेता पर बनी है और पंजाबी के अलावा तीन भाषाओं - हिंदी, तमिल और तेलगु में रिलीज होगी। अभी हाल ही में इसका टीजर सागा म्यूजिक एवं युनिसीस इन्फोसोल्युशंस के साथ सैवन कलर्स मोशन पिक्चर्स ने जारी किया गया है, जिसे देशभर में जबरदस्त रिस्पांस मिला। फिल्म का दूसरा पोस्टर भी जारी कर दिया गया है।

इस बारे में सुमीत सिंह ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में व्यावसायिक फिल्में बनाने का चलन है। इसके बीच लीक से हटकर एक फिल्म बनाई गई है - सूबेदार जोगिन्दर सिंह। यह एक वीर सैनिक की जिंदगी और घटनाओं पर आधारित है, जो अपनी मातृभूमि की सेवा के लिए जुनून और दृढ़ संकल्प से प्रेरित था। निर्माताओं ने आज फिल्म का ट्रेलर जारी किया। यह आश्चर्यजनक रूप से रोंगटे खड़े कर देने वाला है। सूबेदार जोगिंदर सिंह सिख रेजिमेंट के असाधारण सैनिकों में से एक थे, जिन्हें भारत-चीनयुद्ध 1962 के दौरान राष्ट्र की संप्रभुता की रक्षा के लिए, असाधारण साहस और उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए सर्वोच्च वीरता पुरस्कार - परमवीर चक्र से नवाजा गया। फिल्म का ट्रेलर आकर्षक है, जिसे किसी भी व्यक्ति को देखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हमने इस फिल्म में सैनिकों का जुनून और आक्रामकता, निजी रिश्ते और एक मातृभूमि के प्रति अपनेपन की भावना दिखाने का प्रयत्न किया है। यह उल्लेखनीय है कि फिल्म 1960 के युग को फिर से दोहराने में सक्षम है। इसमें उस समय के गांव का माहौल, वेशभूषा और विशेषरूप से उस समय को दर्शाने के लिए बनाई गई विशाल ट्रेन इस बात के प्रमाण हैं। फिल्म को सबसे यथार्थवादी और प्रामाणिक महसूस कराने के लिए बड़े पैमाने के सेट तैयार किये गए थे। भारत के सच्चे नागरिकों के रूप में हम सभी को हमारे देश के समृद्ध और ठोस इतिहास पर गर्व करना चाहिए। वास्तव में, आज जरूरत है कि इस तरह के शक्तिशाली विषयों को सिनेमा की व्यापक दुनिया के जरिये उठाया जाये। ताकि हमारे इतिहास के कई अनसुने और अनपढ़े अध्यायों को साझा किया जा सके और उन अज्ञात नायकों को श्रद्धांजलि दी जाए, जिन्होंने राष्ट्र के लिए कड़ी मेहनत और बलिदान दिए थे। यह फिल्म हर भारतीय को एक बार अवश्य देखनी चाहिए। इतिहास में इस तरह के कई तथ्य हैं, जिन्हें खोजा जाना चाहिए। दर्शकों तक उन्हें पहुंचाया जाना चाहिए। इस तरह के विषय जानकारी पूर्ण और दिलचस्प होते हैं।

तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े मेगास्टार पवन कल्याण अपने राजनीतिक दल ‘जनसेना’ के चौथे वर्षगांठ का जश्न मनाया

आंध्र प्रदेश : चार साल पहले, 14 मार्च 2014, तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े मेगास्टार पवन कल्याण अपने राजनीतिक दल ‘जनसेना’ का गठन किया था। आंध्र प्रदेश में पार्टी के चौथे वर्षगांठ का जश्न मनाया गया। एक नेता के रूप में, पवन कल्याण ने एक भी सीट के लिए चुनाव लड़ें बिना 2014 के चुनावों में आम जनता को प्रभावित किया और जनमत से अंतिम आदेश के परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई थी।

जनसेना पार्टी की स्थापना पवन कल्याण ने न्याय के सिद्धांतों और निष्पक्षता के आधार पर की थी। इस महान भूमि के ज्ञान और परंपराओं की पुरानी भारतीय लोकाचार और अखंड श्रृंखला को बनाये रखेते हुए, पार्टी आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में सक्रिय है।

एक साधारण निम्न मध्यम वर्ग के परिवार में जन्मे पवन कल्याण एक सुंदर, करिश्माई व्यक्तिव का प्रतिनिधित्व करते हैं और राजनीतिक नेतृत्व से जुड़े रूढ़िवादी विषयों को पार करने की नैतिक क्षमता रखते हैं। उनके सामान्य भारतीय के साथ शक्तिशाली संबंध, सभी उम्र के बढ़ते अनुयायी, और उनके साथ सभी अनुयायियों, दोस्तों और सहकर्मियों से उनकी रोजमर्रा की बातचीत, उनकी शिक्षा जो उन्हें उच्चतम विद्वानों, उनकी नम्रता और सार्वजनिक नैतिकता के प्रति असाधारण प्रतिबद्धता निर्माण से एक महान नेता की विशेषताएं झलकती हैं।

उनकी राजनीतिक यात्रा पर बोलते हुए श्री कल्याण जी ने कहा ‘मैं एक भारतीय हूं और भारतीय रहूँगा, मेरा देश मुझे सेवा करने के लिए कहेगा और मैं सेवा करूँगा देश को प्रतिबद्ध व्यक्तियों की आवश्यकता हैं। दूसरों को कहने के बजाय खुद आगे आना चाहिए, मैंने इस रास्ते पर चलने का फैसला किया हैं मेरी यह राजनीतिक यात्रा एक आजीवन यात्रा हैं। मैंने राजनीतिक अवसर प्राप्त करने के लिए राजनीति में प्रवेश नहीं किया बल्की समाज की सेवा करने और जनता के हितों की रक्षा करने के लिए किया हैं। मैं लोगों के लिए हूँ लोगों से और लोगों के द्वारा हूँ’।

जनसेना के सिद्धांत और आदर्श 

♦ जातिआधार के बिना सामाजिक चेतना
♦ धार्मिक भेदभाव के बिना राजनीति 
♦ भाषाई मतभेदों का सम्मान 
♦ हमारी परंपराओं और संस्कृति का संरक्षण 
♦ राष्ट्रीयता जो क्षेत्रीय विविधता की उपेक्षा नहीं करता हैं 
♦ यह हमारे देश की ताकत की जड़ हैं 
यह जनसेना के आदर्श हैं । 

पार्टी के उद्देश्य और मिशन 

आंध्र प्रदेश में वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति में, जनसेना, पवन कल्याण के नेतृत्व में आंध्र प्रदेश के लिए विशेष दर्जे की मांग दिलवाने के लिए लड़ना चाहती हैं। एक स्थिर उद्देश्य के रूप में राजनीतिक दृढ़ता प्राप्त करने के लिए, श्री कल्याण जी नैतिक राजनीति को केंद्र में वापस लाना चाहते हैं। वह आवाज-हीन और दमन किये गए लोगों को आवाज देने के लिए काम करना चाहते हैं । वह जनसेना के सिद्धांत को अवतीर्ण करना चाहते हैं और विशाल जनसंख्या जो उनके पक्ष को समझने और  सिद्धांतों को अपनाने के लिए अनुसरण करें और हमारे पीछे उन भेदभावपूर्ण और विभाजनकारी राजनीति को दफन करते हैं जो समाज में तनाव और अस्थिरता फैलाते हैं । वह राजनीति में नए युवकों का भाग लेना चाहते हैं, जिससे कि युवाओं में भेदभाव न रहे और हमारे राजनीति के दूषित सिस्टम और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाएं इस पर बात करते हुए श्री कल्याण कहते हैं, ‘आंध्र प्रदेश अपने प्रतिनिधियों की गलतियों और उनकी शक्तियों की वजह से जूझ रहा है। हमारा उद्देश्य इसे सही करना हैं, लोगों को प्राथमिकता देंना हैं, शक्ति नहीं’।

आगे का दृष्टिकोण  

पवन कल्याण एक आम वजह के लिए लोगों को एकजुट करना चाहता हैं । जब विकास, समाज का कल्याण, सिद्धांत और राजनीतिक नैतिकता सभी पिछली सीट पर चले गएँ हैं, वह समाज का ध्यान वापस नैतिकता और समूह के बीच भेदभाव के बिना लोगों को लाभान्वित करने के लिए सुधारवादी राजनीति लाना चाहते हैं । वह लोगों को प्रोत्साहित करना चाहते हैं, उदाहरण के लिए, सैद्धांतिक राजनीति के लिए दृढ़ खड़े होने के लिए, जो उचित और सुधारवादी हो।

जैसा कि श्री कल्याण कहते हैं, ‘जनसेना सत्ता के उद्देश्य के लिए नहीं है, बल्की राजनीतिक दलों और नेताओं से सवाल करने के लिए हैं । जनसेना का उद्देश्य राजनीतिक सत्ता के साथ या उसके बिना अच्छा काम करना है’।

मंगलवार, 6 मार्च 2018

फिल्म सूबेदार जोगिन्दर सिंह के पहले पोस्टर ने मचाया इंटरनेट पर तहलका !

मुम्बई : परमवीर चक्र प्राप्तकर्ता, जांबाज सैनिक सूबेदार जोगिन्दर सिंह के जीवन पर आने वाली बायोपिक आजकल चर्चा का विषय बानी हुई है। चाहे गिप्पी गरेवाल की फर्स्ट लुक हो या फिल्म का टीजर, इस फिल्म की हर रिलीज ने इंटरनेट पर तूफान ला दिया है। आज फिल्म का पोस्टर रिलीज हुआ, जिसने एक बार फिर सोशल मीडिया की दुनिया को हिला कर रख दिया।

इस फिल्म के पहले जबरदस्त पोस्टर ने दर्शकों के दिल के अंदर एक उत्सुकता पैदा कर दी है। चर्चा का विषय बनी यह फिल्म सूबेदार जोगिन्दर सिंह के जीवन पर आधारित है।

जिन्होंने 1962 में इंडो-सिनो जंग में सिर्फ 21 बहादुर सैनिकों के साथ हजारों चीनी फौजियों का मुकाबला किया। उन्होंने अपने 21 साथियों सहित आखिरी दम तक अपने असीम शौर्य के साथ लड़ते हुए शहादत प्राप्त की थी। जिसके लिए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

इस फिल्म की शूटिंग द्रास, कारगिल, गुवाहाटी और सूरतगढ़ में की गयी है। निर्माता फिल्म का ट्रेलर 8 मार्च 2018 को जारी करने के लिए तैयार हैं।

फिल्म 6 अप्रैल 2018 को दुनिया भर में सिल्वर स्क्रीन पर दिखाई जाएगी।

रविवार, 25 फ़रवरी 2018

सेंट्रल मॉल एचडी का इंदौर में भव्य री-लॉन्च

18 शहरों में मौजूद 33 सेंट्रल स्टोर्स

इंदौर : फ्यूचर ग्रुप ने इंदौर मध्य में ग्रैंडर, बिगर और बैटर ‘ट्रेजर आइलैंड नेक्स्ट मॉल‘ को री-लांच किया है, जिसका वादा है कि वो इंदौर के फैशन बेंचमार्क को हमेशा के लिए बदल देगा। ये मॉल 75,000 वर्ग फुट के विशाल एरिया में फैला है। री-लांच किया गया नए अवतार वाला मॉल अपने ‘हाई डेफिनिशन‘ ऑफर्स, विश्व स्तरीय डिजाइन और लेटेस्ट ट्रेंड्स के 500 से ज्यादा ब्रांडों के साथ खरीददारी करने वाले उन लोगों के लिए वन स्टॉप डेस्टिनेशन बनने जा रहा है, जो हमेशा वक्त के साथ चलना पसंद करते हैं। यह प्रतिष्ठित लॉन्च कार्यक्रम बॉलीवुड अभिनेत्री ऐली अवराम के साथ होगा, जिससे इस इवेंट में स्टाइल और ग्लैमर का जोड़ लगेगा। रेडियो चैनलों के सेलिब्रिटी आरजे, इस विशाल इवेंट का हिस्सा बनेंगे। रेडियो सुनने वाले अपने पसंदीदा आरजे को सुन सकेंगे और स्टोर के बारे में अपना अनुभव साझा करेंगे। 

ऐसे आयोजनों में बॉलीवुड की हस्तियां और आरजे अपना अलग ही आकर्षण और जलवा बिखेरते हैं। इसके अलावा ग्राहकों के लिए हमेशा नए ऑफर्स भी एक पुरस्कार जैसा है, जो बड़े स्तर पर उत्सवी भावना को उजागर करता है। 3,000 रुपए की खरीददारी करने वाले ग्राहकों को मार्च, अप्रैल और मई के महीने के लिए 1500 रुपए (500 रुपए में) का गिफ्ट वाउचर मिलेगा। इसके अलावा, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के कार्ड धारक ग्राहकों को 2,000 रुपए की शॉपिंग पर 500 रुपए की छूट मिलेगी। पहले 1,000 खरीददार को सेंट्रल मॉल से एक टी-शर्ट प्राप्त होगी, वो भी मुफ्त में। ‘पे-टीएम‘ और ‘मोबिकविक‘ के उपयोगकर्ताओं के लिए भी कई तरह की कस्टमाइज्ड ऑफर्स हैं। निजी आमंत्रण वाले ग्राहकों को 4,000 रुपए की खरीददारी पर 500 रुपए की छूट है। बड़े क्लब और सोसायटी के ग्राहकों के लिए भी ऑफर प्रदान किया गया है। मॉल का री-लॉन्च आयोजन का दिन 360 डिग्री का है, जो खास है और हर किसी के लिए अविस्मरणीय है।  

इस आयोजन के बारे बताते हुए सेंट्रल मॉल के सीईओ श्री विष्णु प्रसाद ने कहा, ‘आज भारत के अधिकांश लोग फैशन के प्रति जागरूक और फैशन केंद्रित हैं। इंदौर को अकसर फैशन की अगली राजधानी के रूप में जाना जाता है। इसलिए, व्यवसायिक स्तर पर, सेंट्रल मॉल को भव्य स्तर पर एचडी-अवतार में री-लांच करना आवश्यक था।‘ 

सेंट्रल के बारे में :

फ्यूचर लाइफ स्टाइल फैशन का प्रमुख रिटेल स्टोर है। ‘सेंट्रल‘ बड़े भारतीय महानगरों और शहरों के केंद्रीय क्षेत्रों में स्थित फैशन डिपार्टमेंटल स्टोर की एक चैन है। सेंट्रल स्टोर्स बड़े आकार के स्टोर हैं जो कि 60,000 वर्ग फुट के बीच 230,000 वर्ग फुट में फैले होते हैं। पुरुषों के परिधान, केजुअल ड्रेस, एथेनिक कपडे, महिलाओं के परिधान, बच्चों के कपड़े, जूते और एस्सेसरीज सहित हर श्रेणी में 500 डोमेस्टिक और इंटरनेशनल ब्रांडों की पेशकश करते हैं। ये स्टोर ऐसे स्थानों पर स्थित हैं जहाँ फूड-कोर्ट, रेस्तरां, सुपर मार्केट और इलेक्ट्रॉनिक्स सुपर स्टोर्स भी हैं। सेंट्रल मॉल मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और गुड़गांव जैसे बड़े शहरों में हैं, इसके साथ ही बड़ौदा, इंदौर, विजाग, पटना और सूरत जैसे छोटे शहरों में भी स्थित हैं। वर्तमान में 18 शहरों में मौजूद 33 सेंट्रल स्टोर्स हैं जो पूरे भारत में 3 मिलियन स्क्वायर फुट रिटेल स्पेस से संचालित होते हैं।

शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2018

चुनाव जीतने और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी पर बढ़त बनाने के लिए लेने लगे हैं पीआर कंपनियों का सहारा

- अतुल मालिकराम

इन्दौर : इन दिनों कंपनियों के बीच आपसी होड़ बढ़ी है। अपने हर प्रोडक्ट को बेहतरीन बताने की मार्केटिंग बनाई जा रही है। अपने हर प्रोडक्ट के लिए विज्ञापन तो दिया नहीं जा सकता, इसलिए रणनीति के तौर पर पब्लिक रिलेशन कंपनियों (पीआर) का महत्व बढ रहा है। उद्योग संगठन 'एसोचैम' के अनुमान के मुताबिक भारत में पब्लिक रिलेशन का बिजनेस सालाना 32 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। 2008 में इस उद्योग का सालाना कारोबार 300 करोड़ डॉलर था, जो आज हज़ार करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है। इसके पीछे तर्क यही है कि आर्थिक तेजी के इस दौर में ज्यादातर कंपनियां बिक्री और कारोबार बढ़ाने के लिए 'पब्लिक रिलेशन' पर ज्यादा भरोसा कर रही है। लेकिन, 'ऐसोचैम' को चिंता ये है कि तेजी से बढ़ते इस कारोबार के लिए पारंगत लोग मिलेंगे कहाँ से?

कम्पनी ने सोशल मीडिया पर दिखाया कमाल

अब इन पीआर कंपनियों का उपयोग सियासी कामकाज के लिए भी होने लगा है। चुनाव जीतने और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी पर बढ़त बनाने के लिए कई राजनीतिक पार्टियां और नेता पीआर कंपनियों का सहारा लेने लगे हैं। अब नेताओं और कार्यकर्ताओं का जन-संपर्क अभियान और पब्लिक की नब्ज़ पकड़ने का काम भी पीआर कंपनियों को दिया जाने लगा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने पीआर कंपनियों के माध्यम से खुलकर चुनाव अभियान चला था। इन कंपनियों ने सोशल मीडिया पर अपना कमाल दिखाया और नरेंद्र मोदी को अच्छी खासी बढ़त मिली! प्रतिद्वंदी के इस कदम का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी की टीम ने भी ऐसी ही एक कंपनी की सेवाएं ली! वह कंपनी सोशल अपने क्लाइंट का शेयर और लाइक बढ़ाती है।

पार्टी की छवि चमकाने की जिम्मेदारी भी इन कंपनियों के कंधों पर होती है

अगले चुनाव में हर पार्टी पीआर कंपनियों की मदद लेने की तैयारी में है। पार्टी के नेता स्वीकार भी करते हैं कि पार्टी के दफ्तर में दो-चार घंटे रोज देने और रणनीति बनाने में कोई समय नहीं देना चाहता! इसलिए पीआर कंपनियों की मदद लेना मजबूरी है। नारे तैयार करने, पार्टी  और नेता के संबंध में प्रचार सामग्री तैयार कराने से लेकर पार्टी की छवि चमकाने की जिम्मेदारी भी इन कंपनियों के कंधों पर होती है। पार्टी नेताओं को उनकी योजना के तहत ही चलना पड़ता है।

राजनीतिक पार्टियाँ भी पीआर कंपनियों की सेवाएं लेने से नहीं हिचकती

चुनाव में पीआर कंपनियों के असर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बड़ी राजनीतिक पार्टियाँ भी पीआर कंपनियों की सेवाएं लेने से नहीं हिचकती। राजनीतिक पार्टियों के लिए काम करने वाली पीआर कंपनियों का होमवर्क चुनाव के काफी पहले से शुरू हो जाता है। इनका सबसे पहला काम प्रत्याशी की इमेज बिल्डिंग करना होता है। पीआर कंपनी जनता के बीच प्रत्याशी की पॉजिटिव इमेज बनाती हैं। प्रत्याशी की इमेज बिल्डिंग के साथ कंपनी अलग-अलग कैंपेन चलाकर मतदाताओं के दिल-ओ-दिमाग पर छाप छोड़ने का काम करती हैं।

भाषण के कंटेंट से लेकर बॉडी लैंग्वेज तक पर रेकॉर्डिंग देखकर किया जाता है काम

पब्लिक रिलेशन और डिजिटल मार्केटिंग के इस दौर में पीआर कंपनियों ने चुनाव को पूरी तरह से प्लांड और मैनेज्ड बना दिया है। चुनाव की हर छोटी-बड़ी जरूरत को ये पीआर कंपनियां अपने तरीके से निपटाती हैं। ये कंपनियां डिजिटल कैंपेन, सोशल मीडिया प्रमोशन और ईमेल एंड एसएमएस मार्केटिंग के जरिए कैंडिडेट के लिए माहौल तैयार करने का काम करती हैं। डिजिटल कैंपेन के तहत कैंडिडेट के भाषणों को लाइव प्रसारित और रेकॉर्ड करके ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जाता है। भाषण के कंटेंट से लेकर बॉडी लैंग्वेज तक पर रेकॉर्डिंग देखकर काम किया जाता है। इसके अलाव ईमेल और एसएमएस के जरिए लगातार और ज्यादा से ज्यादा लोगों से संपर्क बनाने की कोशिश की जाती है। चुनाव के दौरान वोटर्स तक अपनी बात पहुंचाने और विरोधी दल पर हमला करने का सबसे बड़ा साधन भाषण होता है। पीआर कंपनियां नेताओं के भाषण अपनी स्ट्रैटजी के मुताबिक तय करवाती हैं।
(लेखक  "अतुल मालिकराम" 1999 से बिल्डिंग रेपुटेशन, पीआर और डिजिटल कम्युनिकेशन कंपनी के निदेशक और राजनीतिक विश्लेषक हैं) 

गुरुवार, 22 फ़रवरी 2018

'ऑगमेंटेड रियलिटी टेक्नोलॉजी' का ही विज्ञापन बाजार पर असर बढ़ता दिखेगा

- अतुल मालिकराम

इन्दौर : बदलते समय के साथ विज्ञापन, मार्केटिंग और ब्रांडिंग को लेकर कई नए ट्रेंड सामने आए हैं जो आने वाले दिनों में नई उम्मीद जगाते हैं। ख़ास बात ये कि इसकी नीव रखी है डिजिटिल मीडिया, सोशल मीडिया और इंफ्लुएंसर मार्केटिंग (एआर) ने! विज्ञापन बाजार पर नए ट्रेंड का बढता महत्व और टेक्नोलॉजी का विज्ञापन पर बढ़ता प्रभाव सबसे महत्वपूर्ण है। अब सिर्फ अख़बारों में या टीवी  पर विज्ञापन देना काफी नहीं है। नया ट्रेंड सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया पर अपने प्रोडक्ट को विज्ञापित करना है। आंकड़े बताते हैं कि प्रिंट मीडिया का बाजार 8%, टीवी 12% और डिजिटल / सोशल मीडिया का 24% प्रति साल की दर से बढ़ रहा है। आने वाले सालों में डिजिटल और सोशल मीडिया का बाजार और ज्यादा तेजी से बढ़ेगा! इसका सीधा सा कारण है कि विज्ञापन एजेंसियों को जहाँ उपभोक्ता दिखेगा, वहीं वे उसे प्रभावित करने की कोशिश करेंगी। ऐसे में तय है कि 2018 में सबसे ज्यादा प्रभावशाली क्षेत्र यही होगा।

2018 में विज्ञापन जगत के हॉट ट्रेंड के ब्रांड का फोकस डिजिटिल और सोशल मीडिया होगा। सबसे ज्यादा विस्तार होने वाला क्षेत्र डिजिटल मीडिया ही होगा। जो माहौल 2017 में दिखाई दिया, उसके मुताबिक डिजिटल, सोशल और इंफ्लुएंसर मार्केटिंग हर मामले में हावी रहेगा। 2018 में 'एआरटी' यानी 'ऑगमेंटेड रियलिटी टेक्नोलॉजी' का ही विज्ञापन बाजार पर असर बढ़ता दिखेगा। आने वाले सालों में विज्ञापन जगत में वीडियो का भी दखल बढ़ेगा, जिसका चलन सोशल मीडिया में शुरू भी हो गया है। इससे ब्रांड और उपभोक्ता के बीच की दूरी घट रही है। इसके अलावा अब रीजनल प्लेयर्स भी इस मैदान में दिखाई देंगे। लेकिन, हर ब्रांड का फोकस डिजिटल मीडिया पर ही होगा। स्मार्टफोन ने ब्रांड-कंज्यूमर की दूरी को कम कर दिया है। अनुमान कि 2018 में डिजिटल मार्केटिंग 25-30 फीसदी बढ़ेगी। इसलिए कि ब्रांड की उपभोक्ता  तक पहुंच आसान हुई है।

देश में अनुमानत: तकरीबन 12 से 15 करोड़ से अधिक ऐसे लोग हैं जो इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। इनमें से तीन करोड़ से ज्यादा लोग रोज ऑनलाइन होते हैं। इसके अलावा देश में सोशल नेटवर्क का इस्तेमाल करने वाले करीब 5 से 6 करोड़ लोग हैं। इनमें ज्यादातर लोग फेसबुक और लिंक्डइन पर हैं। इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले सभी लोगों में करीब 70 फीसदी लोग वहां रियलिटी शो, फिल्म के ट्रेलर, विज्ञापन आदि से जुड़े वीडियो भी देखते हैं। देश में 10 हज़ार से ज्यादा इंटरनेट कैफे हैं। इसके अलावा देश में करीब 20 करोड़ मोबाइल फोन कनेक्शन हैं, जिनमें से करीबन 15 प्रतिशत स्मार्ट फोन हैं, जिनपर इंटरनेट सुविधा उपलब्ध है। ये आंकड़े अपने आप में बहुत व्यापक नजर आते हैं। लेकिन, जब 1.2 अरब की आबादी के नजरिए से देखा जाए तो ये उतने व्यापक नजर नहीं आते। इसलिए जब डिजिटल मीडिया को एक सहायक माध्यम के तौर पर देखा जाता है, तो आश्चर्य नहीं होता है। हालांकि, यह बात सोचने की है कि क्या हमारे पास इस विस्तार को मापने का सही पैमाना है और क्या पहुंच के मामले में डिजिटल मीडिया बहुत जल्द बड़ा स्वरूप ग्रहण कर लेगा?

मीडिया बाजार का स्वरूप कितनी तेजी से बदल रहा है यह बात चकित करने वाली है। 80 के दशक को याद करें, तो उस वक्त भारत में प्रिंट मीडिया का दबदबा था और महज दो ही सरकारी टेलीविजन चैनल थे। इनका स्वामित्व दूरदर्शन के पास था। 90 के दशक में जब अर्थव्यवस्था में उदारीकरण की शुरुआत हुई तो टेलीविजन जगत में भी तेजी आई और मीडिया जगत पर अचानक टेलीविजन का वर्चस्व हो गया। नई सदी में लक्जरी और प्रीमियम ब्रांडों के उदय तक प्रिंट मीडिया के रचनात्मक लोग प्रमोशनल विज्ञापनों तक सिमट कर रह गए। 90 के दशक के अंत की बात करें तो मोबाइल फोन एक ऐसी लक्जरी थे जिनका इस्तेमाल एक खास तबके के लोग ही करते थे। आज हर हाथ में मोबाइल है। किसी कार्यक्रम की प्रतिक्रियास्वरूप एसएमएस करना आम बात हो चुकी है। अगर व्यापक पैमाने पर डिजिटल को परिभाषित किया जाए और इंटरनेट और मोबाइल को इसमें शामिल कर लिया जाए तो संचार का समूचा परिदृश्य बदला हुआ नजर आ सकता है। यह कुछ ऐसे ही होगा जैसे 90 के दशक में टेलीविजन की वजह से हुआ था। यह बदलाव किसी भी क्षण हो सकता है। मोबाइल और कंप्यूटर की स्क्रीन बहुत जल्द संचार और आपसी चर्चा का दबदबे वाला माध्यम बन सकती है।

अधिकांश बाजारविदों के लिए अधिकाधिक उपभोक्ताओं तक संदेश का प्रसार करना प्रमुख काम रहा है। ऐसे में पिछले दो दशकों के दौरान मास मीडिया की ताकत के सहारे ब्रांडिंग ने उसकी मदद की है। जब इंटरनेट का उदय हुआ तो मास मीडिया से जुड़े लोगों ने इसे व्यक्तिगत स्तर पर संचार का बेहतर माध्यम माना लेकिन इसकी ताकत कहीं अधिक थी। एमटीवी पर युवाओं पर आधारित सबसे सफल कार्यक्रम 'रोडीज' है। इसकी शुरुआत 10 साल पहले एक रियलिटी शो के रूप में हुई। लेकिन, 2008 में एमटीवी ने युवाओं को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया की मदद लेने का फैसला किया। आज फेसबुक पर इसके 37 लाख फैन हैं। जबकि, हर सप्ताह टेलीविजन पर इसे 20 लाख लोग देखते हैं। 'रोडीज बैटलग्राउंड' नामक इस पेज की शुरुआत इसलिए की गई थी ताकि जब यह कार्यक्रम प्रसारित नहीं हो रहा हो तब भी उपभोक्ताओं को इससे जोड़कर रखा जा सके। लेकिन, यह अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब रहा। 'रोडीज़' की सफलता इस बात का प्रमाण है कि डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया की पहुँच कहाँ तक है!

राजनीति में डिजिटल मीडिया 

राजनीति में जीत-हार का गणित अब पीआर (पब्लिक रिलेशन) एजेंसियां और डिजिटल कंपनियां करने लगी हैं। वे ही अब नेताओं और कार्यकर्ताओं को जनसंपर्क अभियान और पब्लिक की नब्ज़ पकड़ने की कला सिखाने लगी है। कहते हैं कि राजनीति के खिलाड़ी काफी चतुर होते हैं। लेकिन, अब उनकी चतुराई को भी पीछे छोड़ने वाले और रणनीतियां बनाने वाले सामने आ गए। अब डिजिटल और सोशल मीडिया वाली कंपनियां नेताओं की राजनीति में मददगार बन रही हैं। देखा जाए तो यह ट्रेंड 'राजनीति' के लिए थोड़ा अटपटा है, लेकिन, जिस तरह देश में युवाओं की संख्या बढ़ रही है, राजनीति का ट्रेंड बदलना भी जरुरी है। क्योंकि, जब जीवन के हर क्षेत्र का कारपोरेटीकरण हो रहा है, तो राजनीति को भी पुराने ढर्रे से बाहर निकालना जरुरी था।

पीआर यानी 'पब्लिक रिलेशन' कंपनियों का मुख्य काम होता है 'ब्रांडिंग और इमेज बिल्डिंग' जिससे नेताओं या पार्टी की समाज में सकारात्मक छवि बनाई जाए। जिसके सहारे उसकी 'चुनावी नैय्या' पार हो सके! इसकी कार्यप्रणाली की बात करें तो, पीआर कंपनियां जनता या टार्गेट ऑडियंस के मन में अपनी क्लाइंट पॉलिटिकल पार्टी या नेता की सकारात्मक छवि बनाने में सक्षम होती हैं। अभी तक वोटर अपने नेता को सिर्फ नाम और चेहरे से ही जानता था, पर अब ये कंपनियां नेता के सकारात्मक पक्ष और उसकी सक्रियता को लोगों के सामने रखती हैं, जो जरुरी होता है। सोशल और डिजिटल मीडिया दोनों के जरिए किया जाता है। इससे सबसे ज्यादा आसानी पार्टी या नेता की होती है, जिसके कार्यक्रम, छवि, विचारधारा, सक्रियता और कामकाज का नजरिया लोगों के सामने आ जाता है। आने वाले कुछ सालों में यदि पूरा चुनाव ही सोशल और डिजिटल मीडिया पर लड़ा जाने लगे तो आश्चर्य नहीं किया जाना चाहिए।

(लेखक अतुल मलिकराम 1999 से बिल्डिंग रेपुटेशन, पीआर और डिजिटल कम्युनिकेशन कंपनी के निदेशक और राजनीतिक विश्लेषक हैं) 

रविवार, 18 फ़रवरी 2018

टिकर ने नया उत्पाद 'टिकर मार्केट' किया लांच, मिली मल्टीपल एप्स से आजादी

इंदौर : टिकर प्लांट लिमिटेड (टिकर) पूरी तरह से 63 मून्स टेक्नोलॉजी की साझेदार हैं। टिकर प्लांट लिमिटेड (टिकर) ने नया और बाजार संचार समृद्ध फीचर लांच करने के शुभारंभ की घोषणा करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की है, जिसे टिकर मार्केट कहा गया है। इसमें इक्विटी, कमोडिटीज, करेंसी, म्यूचुअल फंड जैसी सभी संपत्ति शामिल हैं। नए ऐप के लांच के साथ टिकर का मकसद आम निवेशकों के लिए शून्य लागत पर गुणवत्ता वाले उत्पाद की पेशकश करना है।

इस नए ऐप में कई नई विशेषताएं जैसे मार्केट एनालिसिस, वीडियो कम्युनिकेशन, फंड डिटेल, लर्निंग टूल्स, आईपीओ सिक्लेक्शन शामिल हैं। इस सेगमेंट के पहले फीचर में टिकर टीवी और ट्रेड नाऊ आदि जैसी कुछ विशेषताएं हैं।

इक्विटी मार्केट में निवेश के लिए ट्रेड नाऊ का उपयोग किया जा सकता है। ऐप के उपयोगकर्ता इस सेगमेंट में दिखाई गई संस्थाओं के साथ एकाउंट खोलने में सक्षम होंगे, साथ ही उनके द्वारा पेश किए गए उत्पाद/सेवाओं को देख भी सकते हैं।

निवेशकों के लिए एक अतिरिक्त लाभ के रूप में वे मार्केट और इकोनॉमी के बारे में अर्थशास्त्री/शोध, प्रमुख/विशेषज्ञों के विचार देख सकते हैं। यह उम्मीद भी की जाती है कि कई मार्केट एक्सपर्ट और अन्य रोज टिकर टीवी का हिस्सा होंगे।

17 फरवरी, 2018 को इंदौर में एक कार्यक्रम के माध्यम से यह ऐप लॉन्च किया गया है। पहली बार भारतीय शेयर बाजार के सभी लोकप्रिय सेगमेंट जैसे फ्रेंडली फीचर, आईपीओ, टिकर टीवी, लर्निंग, एमएफ इत्यादि सभी इस एक ऐप में उपलब्ध हैं। इस ऐप में टिकर मार्केट के अलावा 2018 में टिकर से जुड़े नौ नए उत्पादों को देखा जाएगा। उनमें से कुछ मशीन संबंधी सीख और अर्टिफीशियल इंटेलिजेंसी में भी मदद देगी। टिकर के उपयोगकर्ताओं की संख्या ने हाल ही में 1000 संस्थाओं को चिन्हित किया गया है जो वित्तीय बाजार की पूरी वैल्यू चैन की जानकारी रखने के इच्छुक हैं- ये बात टिकर के जॉइंट सीईओ अरिंदम साहा ने कही।

इंदौर में आयोजित टिकर के इसी समारोह के दौरान कई बड़े तेल और तिलहन उत्पादों की विभिन्न किस्मों सहित कृषि बाजार को रिपोर्टों कवर करने की भी शुरूआत की गईं। भारत के साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक डॉ बी वी मेहता ने कहा - सही और समय पर बाजार की जानकारी निर्णय लेने में मदद करती है। टिकर का ये नया ऐप व्यापार, उद्योग और किसानों को अद्यतन जानकारी पाने में मदद करेगा और उनके व्यवसाय में मददगार बनेगा। सरसों, क्रूड पाम आयल, रिफाइंड सोया और मूंगफली की रिपोर्ट कवर करना टिकर एमवीटी (डेस्कटॉप सोल्युशन) और टिकर एमवीएम (मोबाइल बेस्ड सोल्युशन) के प्रमुख उत्पाद होंगे।

टिकर प्लान्ट लिमिटेड के बारे में (टिकर)

टिकर वित्तीय सूचना सेवा उद्योग में अग्रणी वैश्विक कंटेंट प्रदाताओं में से एक है जो अल्ट्रा-लो विलंबता डेटा फीड्स, समाचार और सूचना को एकीकृत करके प्रसारित करता है। रीयल-टाइम मार्केट डाटा और सूचना, टिकर के स्वयं के अत्याधुनिक मंच पर उपयोगकर्ता के अनुकूल और लचीली प्रारूप में वितरित की जाती है, साथ ही साथ मोबाइल फोन सहित तीसरे पक्ष की वेबसाइट पर भी वितरित की जाती है।

खुले प्रौद्योगिकी मानकों की टिकर को अपनाने से यह समृद्ध सुविधाओं और विश्लेषणात्मक उपकरणों के साथ सामग्री को एकीकृत करने, अनुकूलित वितरण, डाटा और टेक्नोलॉजी के माध्यम से ग्राहक का अनुभव को बढ़ाने में मदद करता है। रिसीलाइंट डाटा मेनेजमेंट सिस्टम और सूचना और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों की समर्पित टीमों ने डाटा सुरक्षा के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित किया है। अब 2018 में ये पूर्णता, गुणवत्ता और प्रमाणीकरण संगठन 9 उत्पादों को लॉन्च करने की योजना बना रहा है जिसमें डाटा, सूचना और विश्लेषण के व्यापक स्पेक्ट्रम शामिल हैं।

शनिवार, 17 फ़रवरी 2018

मुजफ्फरपुर में वी.आई.पी. इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने ‘वीआईपी लाउंज‘ शुरू किया

- यह स्टोर विशेष रूप से वीआईपी, कैपरीसी, कार्लटन, स्काईबैग और एरिस्ट्रोक्रेट जैसे ब्रांड बेचेगा

मुजफ्फरपुर : भारत के प्रमुख लगेज ब्रांड, वी.आई.पी इंडस्ट्रीज ने मुजफ्फरपुर में अपने तीसरे एक्सक्लूसिव ब्रांड स्टोर के शुभारंभ की घोषणा की। लगभग 2500 वर्गफुट क्षेत्रफल वाला ये पूर्वी भारत का सबसे बड़ा लगेज स्टोर है। इस लाउंज में वीआईपी, कार्लटन, स्काईबैग, कैपरीसी और एरिस्ट्रोक्रेट के लेटेस्ट स्टाइल की ट्रॉलीज, हैंडबैग, बैकपैक और लगेज बैग्स उपलब्ध होंगे।

मोतीझील के सामने स्थित ये वीआईपी लाउंज शहर का सबसे बेहतरीन लगेज स्टोर है। इसका भव्य उद्घाटन भी इस तथ्य को प्रमाणित करता है कि यह स्टोर वास्तव में मुजफ्फरपुर के लिए एक ‘उपहार‘ है। इस स्टोर का शुभारंभ अमीय प्रकाष, हेड रिटेल, वीआईपी इंडस्ट्रीज द्वारा किया गया।

भारत में चार दशकों से अधिक समय से आजतक वी.आई.पी इंडस्ट्रीज अपने उत्पादों की गुणवत्ता और स्थायित्व के लिए जाना जाता है। यही कारण है कि इसका उपयोग कई पीढ़ियों द्वारा किया जा रहा है। कंपनी के पास 250 कंपनी प्रबंधित स्टोर हैं और पूरे देश में लगभग 300 फ्रैंचाइजी स्टोर हैं। इसके अलावा कंपनी 1500 से अधिक मल्टी-ब्रांड डीलर और 3000 से अधिक मल्टी ब्रांड रिटेलर के साथ काम करती है, जो वी.आई.पी उत्पादों की बड़े पैमाने पर बिक्री सुनिश्चित करते हैं।

मुजफ्फरपुर में अपने तीसरे एक्सक्लूसिव स्टोर के शुभारंभ के बारे में बात करते हुए वी.आई.पी इंडस्ट्रीज लिमिटेड के सीनियर वाईस प्रेजिडेंट (मार्केटिंग, सेल्स एंड सर्विस) सुदीप घोष का कहना है, ‘हम मुजफ्फरपुर में अपने मौजूदा स्थिति का विस्तार करके बेहद खुश हैं, जो हमारे ब्रांड के प्रमुख बाजारों में से एक है। हमारी इच्छा है कि वी.आई.पी इंडस्ट्रीज को बनाने वाले विभिन्न प्रकार के लोगों के साथ सभी क्षेत्रों के लोगों की सेवा की जाए। यह स्टोर हमारे दृष्टिकोण को एक कदम से आगे ले जाता है। हम आगे के वर्षों में और ज्यादा ‘वी.आई.पी लाउंज‘ खोलने की अपेक्षा कर रहे हैं।‘

‘वी.आई.पी लाउंज‘ ने अपने उपभोक्ताओं के लिए अच्छी पेशकश की है और आज से यहाँ सभी नए ब्रांड्स उपलब्ध होंगे।

जाने वी.आई.पी. इंडस्ट्रीज लिमिटेड के बारे में :

1971 में स्थापित वीआईपी इंडस्ट्रीज लिमिटेड एशिया का नंबर 1 लगेज निर्माता है। इस कम्पनी के चार कारखाने प्रति वर्ष लगभग पांच लाख लगेज बनाते हैं। इससे यह दुनिया में लगेज निर्माण का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है। नासिक में अत्याधुनिक ‘वीआईपी डिजाइन लैब‘ को कई अंतरराष्ट्रीय पेटेंट और डिजाइन रजिस्ट्रेशन का सम्मान प्राप्त है। स्थापना के बाद से ही कंपनी ने समझदार और गुणवत्ता चाहने वाले जागरूक यात्रियों की बदलती जरूरत और पसंद के साथ कदम बढ़ाए हैं। वीआईपी इंडस्ट्रीज भारत के साथ दुनिया के कई देशों में जैसे पूरे मध्य पूर्व, ब्रिटेन, अमेरिका, जर्मनी, स्पेन, इटली और अफ्रीकी और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में उपलब्ध हैं।

अशोक लेलैंड ने कैप्टन हॉलिज और 3718 प्लस ट्रक किए लॉन्च

इंदौर : हिंदुजा समूह की प्रमुख कंपनी और भारत में सबसे बड़े वाणिज्यिक वाहन निर्माताओं में से एक, अशोक लेलैंड ने आज इंदौर में कैप्टन हॉलिज और 3718 प्लस ट्रक लॉन्च किए। ये बीएस-4 ट्रक आई-ईजीआर (इंटेलिजेंट इग्जॉस्ट गैस रिसर्कुलेशन) इंजन से युक्त हैं। अशोक लेलैंड ने मेंटनेंस फ्री हब्स, यानी यूनिटाइज व्हीलबियरिंग्स वाले हॉलिज ट्रक भी पेश किए।
इस लॉन्च के अवसर पर मौजूद ग्लोबल ट्रक्स, अशोक लेलैंड लिमिटेड के अध्यक्ष श्री अनुज कथुरिया ने कहा, ‘‘अशोक लेलैंड ने देश के सभी हिस्सों में सभी सैगमेंट में ग्राहकों का विश्वास अर्जित किया है। यह हमारे उत्पादों के साथ ही हमारी नवाचार- संचलित तकनीकों और हमारे ग्राहक-प्रथम दृष्टिकोण के बेहतरीन मेल के कारण संभव हो पाया है। मध्यप्रदेश (एम.पी.) हमारे मुख्य फोकस वाले बाजारों में से एक रहा है और यहां हमारे ग्राहक हमारे उत्पादों में पैसे लगाने की सार्थकता देख रहे हैं। आगे बढ़ने तथा अपनी अग्रणी स्थिति को और सुदृढ़ करने के लिए हमारी रणनीति के हिस्से के रुप में, कैपटन हॉलिज और 3718 प्लस एक अहम भूमिका निभाएंगे।
दोनों ही हमारे ग्राहकों को हमारे ब्रांड के वादे ‘आपकी जीत हमारी जीत’ को पूरा करने में सबसे आगे होंगे। 3718 ने फ्लाई व्हील ट्रक पुरस्कार जीता। जीत के संयोजन में शामिल हैं प्रतिस्पर्धी मूल्य, उच्च ईधन दक्षता, अधिक पे लोड और भारी-भरकम कामकाज। कुल मिलाकर इनके परिणाम स्वरुप परिचालन और रखरखाव की लागत कम हो जाती है और बेहतर गतिशीलता व टिकाऊपन मिलता है। हमारी इनोवेटिव आई-ईजीआर तकनीक के साथ मिलकर यह सब ग्राहकों के लिए परिचालन लागतों को घटाने में मदद करेगा, जिसका नतीजा ऊंचे मुनाफे के रुप में मिलता है।
कैप्टन हॉलिज ट्रकों को खासतौर पर ज्यादा से ज्यादा समय तक काम कर सकने (अपटाइम) और तमाम काम तेजी से निपटाने (टर्न अराउंड टाइम) के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि वेलॉजिस्टिक्स उद्योग की उच्च उत्पादकता मांगों को पूरा कर सकें। आई-ईजीआर तकनीक से युक्त एच सीरीज सीआरएस इंजन से चलने वाला कैप्टन ऊंचा शुरूआती पिकअप, बेहतरीन चालन क्षमता और ईंधन के मामले में बेजोड़ हिसाब-किताब देता है।

गुरुवार, 15 फ़रवरी 2018

राष्ट्रीय नाट्य समारोह के तहत अभिनेत्री सुष्मिता मुखर्जी के नाटक 'नारीबाई' का मंचन 28 फ़रवरी को

इंदौर : अभिनव रंगमंडल द्वारा 28 फ़रवरी को स्थानीय आनंद मोहन सभागृह में जानी-मानी फिल्म और टीवी अभिनेत्री सुष्मिता मुखर्जी के नाटक 'नारीबाई' का मंचन किया जा रहा है। राष्ट्रीय नाट्य समारोह के तहत इस नाटक का मंचन इंदौर के साथ उज्जैन में भी किया जाएगा।
बुंदेलखंड की एक बेड़नी (वेश्या) और एक ब्लॉग लेखक के साथ एक महिला सूत्रधार से जुड़े इस नाटक की लेखक, निर्देशक भी सुष्मिता मुखर्जी ही हैं। सुष्मिता ने बताया कि नाटक में एक औरत की व्यथा कथा को दर्शाया गया है। नाटक 'नारीबाई' एक सोलो एक्ट ही और सच्ची कहानी पर आधारित है। इस नाटक में अंग्रेजी और ब्रजभाषा का मेल दिखाया गया है।
इसमें सुष्मिता मुखर्जी ने अपनी स्कूली दोस्त सुनयना की जिंदगी को दर्शाया है जो बहुत पढ़ी लिखी और अमीर है। उसका पति उसे वेश्या 'नारीबाई' पर नॉवेल लिखने को कहता है। सुनयना अपनी अमीरी छोड़कर उसके कच्चे घर में जाकर रहने लगती है। उसे वहां काफी गंदा माहौल दिखाई देता है। वहां रहने वाले लोगाें और बातचीत के तरीके को भी वो करीब से देखती हैं। ये सब सुनयना अपनी कहानी में लिखती हैं। इसके साथ ही 'नारीबाई' की जिंदगी की परतें खुलनी शुरू होती हैं। इसके बाद एक औरत और बाजार के बीच का रिश्ता और इंसान से सामान बन जाने की कहानी जन्म लेती है।
इस नाटक की प्रस्तुति मुंबई की नाट्य संस्था 'नाटक कंपनी' ने की है। ‘करमचंदमें पंकज कपूर के साथ किटी का किरदार निभाकर शोहरत बटोरने वाली अदाकारा सुष्मिता मुखर्जी पिछले तीन दशकों से एक्टिंग की दुनिया में है। टीवी सीरियल 'करमचंद' में पंकज कपूर के साथ किटी का किरदार निभाकर शोहरत बटोरने वाली अभिनेत्री सुष्मिता मुखर्जी को लोग आज भी ‘किटीके नाम से ही पहचानते हैं।
किटी यानी सुष्मिता मुखर्जी का अपना एक दर्शक वर्ग है। दर्शकों ने सुष्मिता को निगेटिव व पॉजीटिव हर तरह के किरदारों में हमेशा पसंद किया गया है। अब वे फिल्मों और टीवी सीरियल्स के साथ स्टेज पर भी अपनी प्रस्तुति देने के लिए समय निकलने लगी हैं। इंदौर और उज्जैन में वे पहली बार अपनी संस्था 'नाटक कंपनी' के साथ आ रही हैं।
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