loading...

सोमवार, 19 नवंबर 2018

एमवे इंडिया द्वारा जन कला साहित्य मंच संस्था के साथ बाल दिवस का आयोजन


जयपुर : देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी डायरेक्ट सेलिंग कंपनी एमवे इंडिया ने पूरे भारत में 10 एनजीओ सहयोगियों के साथ मिलकर लगातार दसवें साल बाल दिवस मनाया। बाल दिवस समारोह एमवे के सीएसआर प्रोजेक्ट सनराइज का हिस्सा है , जिसके तहत एमवे भारत में शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता सुलभता के द्वारा अल्प सुविधा प्राप्त बच्चों की तंदुरुस्ती को बढ़ावा देता है।

इस समारोह में अनेक क्रियाकलाप किये गए जिनमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। जयपुर में एमवे इंडिया ने जन कला साहित्य मंच संस्था के साथ मिलकर बच्चों को आकर्षित करने के लिए मजेदार गतिविधियाँ आयोजित की जिनमें हस्तशिल्प, विषयवस्तु आधारित चित्रांकन प्रतियोगिता, मनोरंजक खेल और पपेट शो (पुतली प्रदर्शनी) सम्मिलित थे. मनोरंजक गतिविधियों में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

एमवे इंडिया के सीनियर वाईस प्रेसिडेंट (नॉर्थ एवं साउथ), जी.एस.चीमा ने कहा कि, “एमवे इंडिया का सिद्धांत विविध पहलों के माध्यम से लोगों के समग्र कल्याण को बढ़ावा देना और उन्हें अधिकार संपन्न बनाना है। सनराइज प्रोजेक्ट की शुरुआत वर्ष 2008 में की गयी थी। तब से इसके द्वारा पूरे भारत में अल्प सुविधा प्राप्त बच्चों के जीवन में स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता के माध्यम से काफी समृद्धि आयी है. बाल दिवस एक ऐसा दिन है जब बच्चे मौज-मस्ती करते हुए सीख सकते हैं और हमें उनकी उत्साहपूर्ण सहभागिता देखकर खुशी हो रही है. उनके लिए इस दिन को खास बनाना हमारे लिए प्रसन्नता की बात है. हम अल्प्सुविधाप्राप्त बच्चों के कल्याण के लिए सहायता प्रदान करना जारी रखेंगे.”

इस अवसर पर जन कला साहित्य मंच संस्था के सचिव, कमल किशोर ने कहा कि, “हमें अपने बच्चों के लिए विगत दस वर्षों से एमवे इंडिया का लगातार सहयोग मिल रहा है. एमवे इंडिया द्वारा इतने बड़े पैमाने पर पूरे देश में समारोहों के आयोजन से बाल दिवस सचमुच खास हो गया है. अपने बच्चों को इतने उत्साह के साथ गतिविधियों में भाग लेते और आनंद उठाते हुए देखकर बेहद खुशी हो रही है.”

सहभागी बच्चों के बीच पुरस्कार वितरण के साथ समारोह का समापन हुआ.

एमवे इंडिया की सीएसआर इनिशिएटिव्स के विषय में

एमवे इंडिया की सीएसआर इनिशिएटिव्स इस मान्यता पर आधारित है कि सामाजिक उत्तरदायित्व का दायरा सामाजिक लाभ के लिए खर्च या संसाधन या पुण्यध्लोक कल्याण के कार्यों से ज्यादा बड़ा है. यह सामाजिक नवोन्मेकष और परिवर्तन लाने का एक अवसर है. यह मान्यता लोगों को बेहतर जीवन जीने में एमवे की सहयोगात्मक दृष्टि में परिलक्षित होती है. कॉर्पोरेट नागरिकता के प्रति समर्पण के मामले में एमवे इंडिया लोगों तक पहुँचने और उनका जीवन उन्नत करने के लिए गंभीर एवं सघन प्रयाक करता है.

एमवे इंडिया अनेक प्रकार की पहलों के द्वारा एक व्यापक सीएसआर प्रोग्राम को सपोर्ट कर रहा है. इसमें विनिर्माण संयंत्र के आस-पास डिंडीगुल जिले के 7 गाँवों में भूजल स्तर उन्नत करने के लिए जल संभरण परियोजना शामिल हैं. एमवे डिंडीगुल जिले में 26 लक्षित गावों के लिए एक ग्राम्य स्वास्थ्य कार्यक्रम में सहयोग कर रहा है जिसका उद्देश्य अल्पग सुविधा प्राप्त लोगों को उत्तम स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराना है. इसके तहत लाभार्थियों का निःशुल्क सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण, चुनिन्दा पैथोलॉजिकल जांच करके दवाएं दी जातीं हैं. करीब 20 महीनों में 240 से अधिक निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाए गए हैं जिनसे स्थानीय समुदायों के 50,000 से ज्यादा लोगों को फायदा पहुंचा है.
एमवे इंडिया ने डिंडीगुल जिले में ग्रामीणों को लगातार स्वास्थ्य सेवा सपोर्ट मुहैया कराने के लिए एक टेलीमेडिसिन सेंटर स्थापित किया है. इस प्रोग्राम की बदौलत दूरी समाप्त हो गयी है और सुदूर ग्रामीण समुदायों को बेहतर चिकित्सीय सेवाएं सुलभ हुयी हैं. इस सेंटर का लक्ष्य एक साल में 7,000 से अधिक मरीजों का निःशुल्क इलाज करना है.

गत वर्ष एमवे इंडिया ने उत्तर प्रदेश और बिहार के ग्रामीण इलाकों में आजीविका संबंधी प्रशिक्षण और उद्यमिता कौशल प्रदान करने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य एवं उद्यमिता कार्यक्रम आरम्भ किया था. इस प्रोग्राम का उद्देश्य स्त्रियों के स्वरोजगार को प्रोत्साहित करना और सस्ती स्वास्थ्य एवं स्वच्छता पद्धतियों के बारे में जागरूकता पैदा करना है.

एमवे इंडिया ने हाल में पश्चिम दिल्ली के चुनिन्दा स्लम क्षेत्रों में 5 साल से कम उम्र के बच्चों में पोषण अवस्था उन्नत करने के लिए समुदाय आधारित पोषण शिक्षण प्रोग्राम आरम्भ किया है.

प्रमुख फोकस एरिया के रूप में एमवे ने दृष्टि दुर्बलता की समस्यार को दूर करने के लिए विभिन्न कदम उठाये हैं. एमवे ‘सनराइज’ नामक प्रोजेक्ट के तहत अल्पू सुविधा प्राप्त बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता में भी सहयोग करता है. फिलहाल, एमवे इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत देश भर में 15 से ज्यादा एनजीओ को सहायता प्रदान कर रहा है.

एमवे इंडिया को “दिव्यांग नियोजन प्रोत्साहन” वर्ग में ‘सीएसआर लीडरशिप समिट ऐंड अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है.

हाल में एमवे इंडिया को दृष्टि दुर्बलता वालों के कल्याण में बहुमूल्य अंशदान के लिए सीएसआर टाइम्स द्वारा प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सीएसआर सम्मलेन एवं पुरस्कार समारोह 2018 में ‘दिव्यांग’ वर्ग में ‘बेस्ट कॉर्पोरेट’ अवार्ड भी दिया गया है.

शनिवार, 17 नवंबर 2018

मास्टर शेफ ऑस्ट्रेलिया सीजन 10 : शेफ सारांश गोइलाने में बटर चिकन पकाकर धूम मचाई

राष्ट्रीय : सेलिब्रिटी शेफ और गोइला बटर चिकन के सह-संस्थापक सारांश गोइला- मास्टर शेफ ऑस्ट्रेलिया के 10 वें सीजन में गेस्ट जज के रूप में नजर आएंगे, जहां वे प्रतिभागियों को इंडियन फूड बनाने के लिए चुनौती देते नजर आएंगे। वह पहले भारतीय शेफ होंगे जिनके पास बटर चिकन कुकिंग के लिए पूरा सेगमेंट होगा और वे शो के स्पेशल एपिसोड में अन्य सजजेस शेफ जॉर्ज कैलोम्बारिस, मैट प्रेस्टन और शेफ गैरी मे हगन के साथ नजर आएंगे। यह एपिसोड स्टार वर्ल्ड पर 23 नवंबर को रात 9 बजे प्रसारित होगा।

मास्टर शेफ ऑस्ट्रेलिया ने न केवल ऑस्ट्रेलिया में बल्कि दुनियाभर में लोकप्रियता हासिल की है! इसकी 10वीं वर्षगांठ के विशेष सीजन में शेफ सारांश को गॉर्डन राम से और निगे ला लॉसन जैसे दिग्गजों के साथ शामिल किया जाएगा, और यह वास्तव में रोमांचक होने का वादा करता है।

शेफ सारांश गोइला मास्टर शेफ ऑस्ट्रेलिया पर कांटे की टक्कर और वाले एलिमिनेशन चैलेंज में प्रतिभागियों को बटर चिकन रेसिपी को फिर से बनाने के लिए चुनौती देंगे, और यह युवा शेफ इस एपिसोड के देश में प्रसारण के लिए विशेष रूप से उत्साहित है।

दुनिया के सबसे बड़े कुकिंग रियलिटी शो में से एक के जज के बारे में अपने अनुभव को याद करते हुए सारांश गोइला ने कहा कि ‘‘मैं अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रहा था, इसलिए मुझ पर भी काफी दबाव था। मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया और सुनिश्चित करना पड़ा कि हमारे व्यंजन का अच्छी तरह से प्रतिनिधित्व किया जाए और सभी को रेसिपी का स्वाद बहुत अच्छा लगे।’’

इस बात को दोहराते हुए कि कैसे उन्होंने प्रतिभागियों के लिए बटर चिकन रेसिपी को फिर से तैयार करने का फैसला किया, सारांश ने कहा कि यह इतना आसान नहीं था। ‘‘हर कोई यह जानकर हैरान था कि कैसे टमाटर, क्रीम और मक्खन का उपयोग करके बनाई गई एक सामान्य डिश नहीं है, बल्कि मेरे वर्जन में पुरानी टेक्निक्स और मसालों के दिलचस्प मिश्रण का प्रयोग किया गया है। उन्होंने कहा कि मुझे फाइनल चेलेंज के लिए रेसिपी को प्रतिभागियों के साथ साझा करने से पहले मास्टर शेफ ऑस्ट्रेलिया किचन में चार बार इस काटेस्ट करना पड़ा।’’ उनके गोइला बटर चिकन ने पूरे देश में नॉन वेजिटेरियन फूड लवर्स को प्रभावित किया और इसका ऐसा ही प्रभाव मास्टर शेफ ऑस्ट्रेलिया के जज शेफ जॉर्ज कैलोम्बारिस पर पड़ा था, जब वे पिछले साल भारत आए थे।
 
शेफ सारांश ने 2017 में शेफ कैलोम्बारिस से मुलाकात की थी और उन्हें अपने बटर चिकन रेसिपी का स्वाद चखाया था, जिसने शेफ को खुशकर दिया और उन्होंने सारांश गोइला को ‘‘दुनिया में सर्वश्रेष्ठ बटर चिकन शेफ’’ का लेबल दिया था! सारांश गोइला को मार्च 2018 में मेलबर्न फूड एंड वाइन फेस्टिवल के हिस्से के रूप् में पॉप-अप की मेजबानी के लिए आमंत्रित किया गया था।

अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करते हुए शेफ सारांश ने कहा, ‘‘मैं इंडियन फूड को ग्लोबल बनाने को लेकर दृढ़ संकल्पित हूं और हमारे पास भारत में ही विविध और शानदार व्यंजन हैं। ये कहानियां और अद्वितीय अनुभव इसे वैश्विक स्तर पर ले जाने के मेरे मिशन का हिस्सा हैं!’’

देखिये भारत में इस एपिसोड का प्रसारण 23 नवंबर 2018 को रात 9 बजे होगा।

कैंसर पीड़ित फैन के साथ मनीष ने एक इमोशनल मूमेंट शेयर करते हुए उसे इंडियन आईडल के सेट पर बुलाया


मुम्बई : कुछ सेलेब्रिटीज के लिए सिर्फ उनकी उपस्थिति ही हर किसी के लिए एक सबसे बड़े उपहार का कारण बन सकती है, खासकर उन प्रशंसकों के लिए जो गंभीर मेडिकल कंडीशन से गुजर रहे हैं। अपने पसंदीदा स्टार से मिलना हमेशा ही एक भावनात्मक अनुभव होता है, बिमारी से जूझ रहे इन फैंस के लिए यह उनके जीवनभर के सबसे ख़ास पलों में से एक होता है। उनकी हंसी, आंसू और मुस्कान सब कुछ इन प्रसिद्ध लोगों की तुलना में कहीं अधिक कट्टरपंथी दिखाई पड़ता है। हमारे बहुत प्रिय होस्ट मनीष पॉल ने इंडियन आईडल के सेट पर अपने सबसे बड़े फैन के साथ एक ऐसा ही पल शेयर किया।
जहां हम मनीष को उनकी बेमिसाल कॉमिक टाइमिंग और अचूक कमबैक के लिए जानते हैं, वहां उनकी एक ऐसी मेडिकल पेशेंट फैन भी है जो इंडियन आईडल के किसी भी एपिसोड को मिस नहीं करती। असल में, वह केवल मनीष के लिए शो देखती है और पिछले दिनों अपने सबसे कूलेस्ट होस्ट से मिलने भी पहुंच गई थी। जैसी ही मनीष को इस बात की खबर लगी वह खुद को रोक नहीं पाए और उसके पसंदीदा होस्ट को मंच पर लाइव दिखाने के लिए इंडियन आईडल के सेट पर बुला लिया। इसके बाद दोनों ने कुछ समय साथ बिताया और मनीष ने उन्हें मंच पर भी बुलाया, इस पल ने पूरे सेट पर एक इमोशनल माहौल पैदा कर दिया!
एक सोर्स के मुताबिक, “सौम्या ने खुलासा किया कि वह कैंसर के लिए अपना इलाज करा रही हैं, और उनके इन मुश्किल दिनों में वो एकमात्र व्यक्ति जो उनके चेहरे पर मुस्कान लाता है वह मनीष हैं, यही कारण है कि वह यह शो देखती हैं। इसके अतिरिक्त मनीष भी उन्हें अपने साथ सेट पर लाने के लिए बेहद प्रसन्न नजर आए।“

गुरुवार, 15 नवंबर 2018

भारत के राजनीतिक इतिहास में पहली बार किसी पार्टी ने दिया दिव्यांगों को विधानसभा पहुंचने का मौका

देश के पंचायती संगठनों से उभरी भारतीय पंचायत पार्टी ने राजस्थान विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टी की ओर से दिव्यांग प्रत्याशियों को टिकट देने का फैसला किया है। राजस्थान समेत मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़, तेलंगाना एवं मिजोरम में होने जा रहे विधानसभा चुनावों की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी भारतीय पंचायत पार्टी की इस अनूठी पहल ने राजस्थान विधानसभा चुनावों को और अधिक दिलचस्प बना दिया है। पार्टी ने फिलहाल 50 दिव्यांग प्रत्याशियों की एक लिस्ट तैयार की है जिनमें ज्यादातर सीटों पर महिलाओं को भी मौका दिया गया है। यह स्वतंत्र भारत के राजनीतिक इतिहास में पहली बार है जब कोई राजनीतिक पार्टी दिव्यांग जनों को चुनावी मैदान में उतारने जा रही है। बीपीपी ने अपने इस कदम के जरिये भाजपा और कांग्रेस सरीखी अन्य दिग्गज पार्टियों को इस बात का संकेत दे दिया है कि पार्टी हर वर्ग विशेष को समानता के साथ आगे लाने और एक आम नागरिक से जुड़ी जमीनी समस्याओं को प्रमुखता देने में विश्वास रखती है। बीपीपी के इस फैसले से दिव्यांगों को भी संवैधानिक सभ्यता से जुड़ने और राजनीतिक के माध्यम से देश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने का मौका मिलेगा।
भारतीय पंचायत पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अविनाश मलिक जो खुद एक दिव्यांग हैं, उन्होंने पार्टी का नारा सांझा करते हुए कहा कि, ष्आज आजादी के इतने वर्षों बाद भी हम दिव्यांग हासिये पर क्यों हैं! यह सोचने वाली बात है इसलिए अब हम बीपीपी के माध्यम से श्दया नहीं सम्मान चाहिए, कृपा नहीं अधिकार चाहिएश् के नारे को बुलंद कर रहे हैं। बीपीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश यादव ने कहा कि जब प्रशासनिक, सामाजिक, आर्थिक और आध्यात्मिक क्षेत्रों से लेकर गायन वादन जैसे क्षेत्रों में विकलांग जन सफलता की सीढ़ियां चढ़ सकते हैं तो फिर राजनीति में भी वह निश्चित रूप से सफल हो सकते हैं। हमारी पार्टी नैतिक रूप से दिव्यांग जनों के साथ बनी हुई है।
भारतीय पंचायत पार्टी के कार्यालय में आयोजित हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस विषय पर अधिक जानकारी देते हुए नरेश यादव ने कहा कि, " देश की किसी भी पार्टी ने जिनको नेशनल पार्टी का दर्जा प्राप्त हैं, पिछले 70 वर्षों में कभी भी किसी दिव्यांग को अपने प्रत्यासी के रूप में चुनावों का हिस्सा नहीं बनाया। राजस्थान में लगभग 15 लाख से अधिक दिव्यांग भाई बहन हैं लेकिन कांग्रेस-बीजेपी जैसे दलों ने आजाद भारत के इतिहास में उन्हें कभी भी मुख्य राजनीति का हिस्सा नहीं बनने दिया। भारतीय पंचायत पार्टी ने किसान, मजदूर, भूमिहीन व दिव्यांग वर्गों के लिए, जिसके लिए कोई भी राजनीतिक दल आज तक आगे नहीं आया हैं, उन्हें लोकसभा-विधानसभा में पहुंचने का अवसर दिया है, क्योंकि जब तक वह खुद विधानसभा और लोकसभा का हिस्सा नहीं बनेंगे तब तक उनकी बात कोई नहीं सुनेगा।"
नरेश यादव के अनुसार, इस देश में अब ऐसी स्थिति पैदा हो गई है कि जब तक आप अपने हक व अधिकार के लिए सड़कों पर नहीं उतरेंगे तब तक आपके मुद्दे की सुनवाई नही होगी। ऐसे में जरूरी है कि इन वर्गों से आने वाले इच्छुक उम्मीदवारों को सक्रिय राजनीति का हिस्सा बनाया जाए। उन्होंने कहा कि आज संविधान की कसम खाने वाले संसद में खड़े होकर झूठे आंकड़े पेश करते हैं, इसलिए ऐसे लोगों के पास देश की जिम्मेदारी नही होनी चाहिए। यह भारतीय पंचायत पार्टी की मांग भी है और समय की पुकार भी। आप देख सकते हैं कि देश में किसानों और युवाओं की कितनी बुरी स्थिति है। युवाओं के पास रोजगार नही है, किसान आत्महत्या करने पर मजबूर है। लिहाजा जरूरी है कि देश की भागदौड़ ऐसे हाथों में हो जो देश से गरीबों को हटाने के बजाय गरीबी हटाने और जन मानस को एक करने की दिशा में काम करे।

न्युवोको : जोजोबेरा सीमेंट प्लांट ने गुणवत्ता माह आयोजित किया

जोजोबेरा : गुणवत्ता पर जोर देते हुए न्युवोको के जोजोबेरा सीमेंट प्लांट (जेसीपी) ने गुणवत्ता माह का उद्घाटन किया, जिसके अंतर्गत गुणवत्ता कार्यक्रमों के माध्यम से महीने भर का जश्न मनाया जायेगा। गुणवत्ता माह का उद्घाटन मनोज अग्रवाल, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट - जेसीपी ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति में गुणवत्ता ध्वज फहरा कर किया गया।
गुणवत्ता माह का जश्न मनाने का उद्देश्य संगठन के प्रत्येक पहलू में, यहां तक कि छोटे क्षेत्रों में भी, गुणवत्ता को लाना और उसे बेहतर बनाना है। किसी भी संगठन के विकास की महत्वपूर्ण पूर्व-आवश्यकताओं में उत्पाद की गुणवत्ता, प्रक्रिया और प्रणाली में सुधार शामिल हैं और इसीलिए नवाचार और भरोसे के साथ न्युवोको के तीन आधार स्तंभों में से एक गुणवत्ता भी है।
इस वर्ष के गुणवत्ता माह का विषय 'हाउसकीपिंग' है, जो प्लांट को साफ-सुथरा रखने के लिए 5एस की जापानी अवधारणा (Sort, Set In order, Shine, Standardize और Sustain) पर आधारित है। लॉन्च के दौरान मनोज अग्रवाल, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट - जेसीपी ने कहा कि 'गुडवत्ता माह का जश्न मनाने का उद्देश्य, विकास को प्रोत्साहित करने के लिए गुणवत्ता को लेकर जागरूकता बढ़ाना है। ट्रस्ट, इनोवेशन और सेफ्टी के साथ गुणवत्ता, हमारे संगठन के आधार स्तंभ हैं। हमें गुणवत्ता को आपूर्ति-संचालित बनाने की बजाय मांग-संचालित बनाने की आवश्यकता है। हम उम्मीद करते हैं कि विश्व गुणवत्ता माह में भाग लेकर, आप संगठन के भीतर सभी गतिविधियों में गुणवत्ता बढ़ाने में मदद करेंगे, जिसका भारी असर पड़ेगा और यह पहल जल्द ही भारत में एक मिशन के रूप में विकसित होगी।'
महीने भर का जश्न मनाने के लिए, जोजोबेरा प्लांट ऑनलाइन क्विज, निबंध लेखन, आंतरिक आईएमएस लेखा परीक्षा, पर्यावरण कानूनों के बारे में प्रशिक्षण, हाउसकीपिंग लेखा परीक्षा और कर्मचारियों, अनुबंधित कर्मचारियों और अन्य हितधारकों के लिए ऐसे ही कई अन्यं कार्यक्रमों सहित विभिन्न पहल की शुरुआत करेगा।

विश्व मधुमेह दिवस 2018 पर, लखनऊ में जागरूकता वॉकेथन का आयोजन

  • मधुमेह के असरदार प्रबंधन के लिए स्वस्थ, सक्रिय जीवनशैली महत्वपूर्ण है
लखनऊ : भारत में जिस तेजी से मधुमेह के रोगी बढ़ते जा रहे हैं, इस पुरानी बीमारी के प्रभावी प्रबंधन के बारे में जागरूकता पैदा करना महत्वपूर्ण हो गया है। मधुमेह के प्रबंधन में शारीरिक गतिविधि का महत्व बताने के उद्देश्य से, विश्व मधुमेह दिवस 2018 पर लखनऊ में एक जागरूकता वॉकेथन का आयोजन किया गया, जिसका नेतृत्व आरएमएलआईएमएस के एंड्रोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. मनीष गुच ने किया। इस वॉकेथन में शरी संख्या में लोगों की व्यापक भागीदारी रही।
मधुमेह सभी उम्र समूहों के लोगों को प्रभावित करता है। भारत में मधुमेह रोगियों में 7 करोड़ 30 लाख वयस्क हैं और यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इन वयस्कों में से लगभग 58 प्रतिशत इलाज के दायरे में नहीं हैं। इसके अलावा, अनुमान है कि भारत के हर 12 वयस्कों में से एक व्यस्क मधुमेह से प्रभावित है।
 
डॉ. मनीष गुच ने बताया कि ष्मधुमेह के जोखिम के प्रति संवेदनशील लोगों की संख्या में वृद्धि का मुख्या कारण उनकी गतिहीन बैठे-बिठाये रहने वाली जीवन शैली है, जिनमें चलने-फिरने के अवसर बहुत कम मिल पाते हैं। लेकिन लोग इससे अनजान हैं। लोगों को स्वस्थ और सक्रिय जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करना समय की आवश्यकता है। रोगियों, स्वास्थ्य का देखभाल करने वाले पेशेवरों और बड़े पैमाने पर जनता की भागीदारी के साथ ही, इस वॉकाथन जैसी पहल, मधुमेह की रोकथाम और इसके प्रभावी प्रबंधन के बारे में चर्चाओं को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है।ष्
 
ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड ने प्रारंभिक निदान और मधुमेह के प्रभावी प्रबंधन के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए किये जा रहे अपने प्रयासों के रूप में वॉकेथॉन का समर्थन किया।
 
हालांकि समग्र मधुमेह की देखभाल की स्थिमति में काफी सुधार हुआ है, लेकिन देश के अधिकांश हिस्सों में मधुमेह प्रबंधन के महत्व और तरीकों के बारे में जागरूकता अभी भी कम है। मधुमेह की रोकथाम और प्रभावी प्रबंधन के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि बेहद जरूरी है। कई मामलों में, जीवनशैली में कुछ सकारात्मक बदलाव लाकर मधुमेह की रोकथाम की जा सकती है या इसे स्थकगित भी किया जा सकता है।
 
आज भी, मधुमेह को केवल हाई ब्लरड शुगर यानी उच्च रक्त शर्करा वाला रोग माना जाता है। लेकिन उच्च रक्त शर्करा के कारण होने वाली समस्याओं जैसे दिल का दौरा, स्ट्रोक,गुर्दे की विफलता और अंधापन दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर जागरूकता में कमी है। एक संतुलित और स्वस्थ आहार के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि मधुमेह के प्रभावी प्रबंधन में, और कुछ मामलों में रोग की रोकथाम में भी, मदद कर सकती है।
 

बुधवार, 14 नवंबर 2018

प्रतिभा सिंटेक्स ने जरूरतमंद महिलाओं के लिए दिवाली के मौके पर मेरे सपनों का भारत पहल के अंतर्गत रोजगार उन्मुखी कार्यक्रम को सम्पन्न किया

इंदौर : महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का एक और उत्कृष्ट उदाहरण पेश करते हुए इंदौर स्थित टेक्सटाइल क्षेत्र की अग्रणी कंपनी प्रतिभा सिंटेक्स ने शहर के नेहरू नगर क्षेत्र से आने वाली कुछ जरूरतमंद महिलाओं के लिए दिवाली के मौके पर मेरे सपनों का भारत पहल के अंतर्गत रोजगार उन्मुखी कार्यक्रम को सम्पन्न किया। मेरे सपनों का भारत पहल के तहत प्रतिभा सिंटेक्स ने एक सर्वे के आधार पर नेहरू नगर इलाके की मुख्य जरूरतों को रेखांकित किया और रोजगार के दृष्टिकोण से महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का निर्णय लिया। यह उन महिलाओं के साथ किया गया जिनकी परिवारिक मासिक कमाई तीन हजार रुपये से कम हैं। इसके लिए संबंधित क्षेत्र में काम करने वाले परिवारों की महिलाओं का चुनाव किया गया। प्रतिभा सिंटेक्स की तरफ से इन महिलाओं को दिवाली के दीयों पर आकर्षक पेंट करने का काम सौंपा गया। इस काम के लिए महिलाओं को इलाके के लोकल दीया बनाने वाले से दीया खरीदकर मुफ्त में पेंट और दीया उपलब्ध कराये गए। प्रतिभा की इस पहल में क्षेत्र की कई महिलाओं ने दिलचस्पी दिखाते हुए बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। महिलाओं द्वारा पेंट की मदद से सजाये गए दीयों को प्रतिभा के कर्मचारियों के बीच बेचा गया और उससे होने वाली कमाई को दिवाली के अवसर पर संबंधित महिलाओं के बीच वितरित किया गया।
मेरे सपनों का भारत पहल से लाभांवित हुई जयंती देवी का कहना है कि वह दीयों से हुई कमाई का इस्तेमाल त्यौहार के दौरान होने वालों खर्चों में करेगी और प्रतिभा सिंटेक्स की इस पहल से जुड़ने के लिए अन्य महिलाओं व लोगों को भी प्रेरित करेंगी। कंपनी के डायरेक्टर श्री श्रेयस्कर चैधरी ने बताया कि, मेरे सपनों का भारत पहल के तहत हमने 14 अगस्त से ही इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया था। इसके लिए जरूरी था कि हम सबसे पहले शहर के किसी एक इलाके का चुनाव करें और वहां के लोगों की समस्याएं और उनके समाधान को चिन्हित करें। नेहरू नगर का चुनाव होने के बाद, हमने इलाके की मुख्य जरूरतों को समझने के लिए हमने सर्वे कराये। सर्वे के आधार पर ही यह निर्णय लिया गया कि हमें इस दिवाली महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने की मनसा के साथ ही हमने इलाके की महिलाओं को अपने साथ जुड़ने के लिए प्रेरित किया। दिवाली के मौके को ध्यान में रखते हुए हमने उन्हें कलरफुल दिये तैयार करने का काम सौंपा। इसके लिए हमारे कर्मचारियों ने महिलाओं को घर जाकर ट्रेनिंग भी दी। हमारी इस पहल से जुड़कर कई महिलाओं ने आर्थिक लाभ तो ग्रहण किया ही, साथ ही दिवाली के मौके को अपने परिवार के लिए और भी खास बना दिया।
अपने कपड़ों की सर्वोच्च गुणवत्ता के साथ ग्राहकों के बीच मजबूत पकड़ बना चुकी प्रतिभा सिंटेक्स समय समय पर समाज के पिछड़े व अछूते वर्गों को ऊपर उठाने के मकसद से इंदौर व आस पास के इलाकों में इस प्रकार के विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करती रहती है। हाल ही में कंपनी ने सरकारी स्कूल से आने वाले बच्चों के लिए एक पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया था, जिसके अंतर्गत बच्चों को आकर्षक पुरस्कार बांटे गए थे। इसके अलावा कंपनी किसानों और ग्रामीण इलाकों के लिए भी चिकित्सा शिविर जैसे कार्यक्रमों का गठन करती रहती हैं।

पेप्सीको कंसाईनमेंट ने इनलैंड वाटरवेज़ पर भारत का पहला कंटेनर मूवमेंट प्रारंभ किया


  • भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वाराणसी के डाँक में पहला कंटेनर वैसेल प्राप्त हुआ।
  • पेप्सीको स्नैक्स के 16 ट्रक लोड के बराबर, 16 कंटेनर कोलकाता से वाराणसी भेजे गए।

वाराणसी : इनलैंड वाटरवेज़ पर भारत के पहले कंटेनराईज़्ड मूवमेंट की शुरुआत करते हुए, पेप्सीको इंडिया पहली कंपनी बनी, जिसने कोलकाता में अपने प्लांट से वाराणसी के पोर्ट पर उत्पादों के परिवहन के लिए कंटेनराईज़्ड वैसेल मूवमेंट का उपयोग किया। पहला कंटनराईज़्ड वैसेल भारत के माननीय प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी द्वारा आज वाराणसी के नए विकसित किए गए मल्टी-मोडल टर्मिनल पर प्राप्त किया गया। इस अवसर पर पेप्सीको इंडिया के प्रेसिडेंट एवं सीईओ, श्री अहमद अल-शेख भी मौजूद थे।

इनलैंड वाटरवेज़ के विकास में इस ऐतिहासिक क्षण के बारे में श्री अहमद अल शेख, प्रेसिडेंट एवं सीईओ, पेप्सीको इंडिया ने कहा, ‘‘हम विभिन्न राज्यों के बीच परिवहन के प्रभावशाली माध्यम के रूप में इनलैंड वाटरवे सिस्टम प्रारंभ करने के सरकार के प्रयासों का स्वागत करते हैं। यह पर्यावरण के लिए मित्रवत भी है। पेप्सीको को कोलकाता में हमारे प्लांट से वाराणसी के पोर्ट तक उत्पादों के परिवहन के लिए कंटेनराईज़्ड वैसेल मूवमेंट का उपयोग करने वाली पहली कंपनी बनने की खुशी है। यह इनलैंड वाटरवेज़ के विकास में एक महत्वपूर्ण मापदंड है और हमारा मानना है कि यह कंज़्यूमर गूड्स उद्योग में बहुत बड़ी सुविधा प्रदान करेगा।’’

पेप्सीको इंडिया ने 16 कंटेनर शिप किए, जो 16 ट्रकलोड के बराबर हैं। इनमें कंपनी के लोकप्रिय स्नैक्स उत्पाद नेशनल वाटरवे-1 पर पायलट प्रोजेक्ट के तहत भेजे गए। ये उत्पाद कोलकाता में पेप्सीको इंडिया के स्नैक्स प्लांट में निर्मित किए गए और अब इन्हें वाराणसी के विभिन्न बाजारों में वितरित किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने वाराणसी में नए विकसित किए गए वाटरवे टर्मिनल का उद्घाटन भी किया, जो सागर माला प्रोजेक्ट के तहत बनाया गया। इस एकमात्र कंटेनर वैसेल, एमवी आरएन टैगोर को कोलकाता से 30 अक्टूबर को श्री गोपाल कृष्णा, सचिव (शिपिंग), भारत सरकार एवं श्री प्रवीर पांडे, चेयरमैन, आईडब्लूएआई एवं पेप्सीको इंडिया के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में रवाना किया गया।

सोमवार, 12 नवंबर 2018

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 : भारतीय पंचायत पार्टी ने जारी की 29 प्रत्याशियों की सूची

इंदौर : भारतीय पंचायत पार्टी ने मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए सूबे के विभिन्न जिलों से अपने प्रत्याशियों की सूची शनिवार को जारी कर दी है. पार्टी के प्रदेश प्रभारी  डॉ सी पी आर्य ने मीडिया को दी जानकारी में बताया कि सागर जिले से रामगोपाल यादव को उम्मीदवार चुना गया है वहीं अशोकनगर जिले की अशोकनगर विधानसभा सीट से दयालु दास शाक्य, चंदेरी सीट से रविंद्र यादव और मुंगावली सीट से रतन लाल प्रजापति को उम्मीदवार घोषित किया गया है. इसके अतिरिक्त शिवपुरी जिले की कोलारस सीट से लखन सिंह यादव, सीहोर जिले की आष्टा सीट से सोभन सिंह सिसोदिया और इछावर सीट से ठा. राजेंद्र सिंह, शाजापुर जिले की कालापीपल सीट से ठा. प्रसाद वर्मा, गुना जिले की चाचौड़ा सीट से गणेशराम लोधी, गुना विधानसभा सीट से हरीश छिरावत और बम्होरी सीट से बालकराम सेहरिया को उम्मीदवार चुना गया है. छतरपुर जिले की चंदला सीट से कामता प्रसाद बंसल, राजनगर सीट से इखलाख खान, सतना जिले की रामपुर बघेलान सीट से उर्मिला कौर, कटनी जिले की मूंडवाड़ा सीट से अमरेश सिंह, बड़वाड़ा सीट से बनिया कौल, होशंगाबाद जिले से धनीराम गौर, विदिशा जिले की सिरोंज सीट से जसवंत सिंह रावत, शमशाबाद सीट से राजेश मालविय, बासौदा सीट से महेश राजेरिया, रायसेन जिले की साँची सीट से कोमल प्रसाद बंसकार एवं हरदा जिले से सुरेश काजले को विधानसभा उम्मीदवार चुना गया है. इसके अलावा सूबे के भोपाल जिले की हुजूर सीट से राजू पाटीदार व नरेला सीट से संजय सरोज, मुरैना जिले की मुरैना सीट से विकास राजपूत, सबलगढ़ सीट से उषा रावत, जौरा सीट से प्रदीप करार, शुभावाली सीट से सुनील यादव एवं अम्बा सीट से राकेश नागर को उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा गया है. भारतीय पंचायत पार्टी ने अपनी इस लिस्ट के जरिये कुल 29 प्रत्याशियों को टिकट सौंपा है. इसके साथ ही अन्य जिलों के प्रत्याशियों की सूची भी जल्द ही जारी कर दी जायेगी.

मोमो चैलेंज का कहर अब भारत में भी

दिल्ली : जनलेवा ब्लूव्हेल गेम के बाद इन दिनों सोशल मीडिया पर एक और सुसाइड गेम ‘मोमो चैलेंज‘ वायरल हो रहा है । न्यूज़18 इंडिया की एक खास रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर के कई देशों में मासूम बच्चों की जान लेने वाला मोबाइल गेम मोमो भारत में दस्तक दे चुका है। इस ऑनलाइन गेम की वजह से अजमेर की एक लड़की खुदकुशी कर चुकी है।
इस खेल की वजह से विदेशों में कई मासूम अपनी जान गंवा चुके हैं। इस गेम का खाने वाले मोमो से कोई लेना-देना नहीं है ये सिर्फ ऑनलाइन खेले जाने वाला एक गेम है जिसमें मोमो बच्चों को गेम में शामिल होने के लिए उकसाता है, और फिर उसकी हालत ऐसी कर देता है कि बच्चा खुदकुशी के लिए मजबूर हो जाता है।
इस ऑनलाइन गेम की वजह से पहली मौत अर्जेंटीना में हुई थी, जहां 12 साल की एक बच्ची ने आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद दुनिया के कई देशों में मोमो चैलेंज का खौफ कायम हो गया।
भारत के अजमेर में अपने जन्मदिन पर केक काटकर घरवालों को खिला रही 15 साल की एक लड़की के दिलो दिमाग में क्या चल रहा था, इसकी भनक परिजनों को भी नहीं थी, लेकिन जन्म दिन के ठीक तीन दिन बाद उन्हें घर में फंदे से लटकता इसका शव मिला। उस लड़की ने खुदकुशी क्यों की, इस सवाल की पड़ताल शुरू होते ही घरवालों के सामने चैंकाने वाली चीजें आने लगीं। उस लड़की के हाथ में कलाई की नस के पास काटे जाने के निशान मिले जिसे देखने से लगता था कि कट उसने खुद बनाए थे। जब परिजनों ने उसके मोबाइल फोन को खंगाला तो तस्वीर बिल्कुल साफ हो गई। उनकी बेटी जानलेवा मोमो चैलेंज का शिकार हो गई थी।
मोमो चैंलेंज की वजह से खुदकुशी की खबर मिलते ही पुलिस भी हरकत में आ गई, क्योंकि इस खौफनाक खेल से भारत में मौत का ये पहला मामला है। हालांकि राजस्थान पुलिस ने लड़की के सुसाइड नोट में परीक्षा में कम नम्बर आने की वजह से खुदकुशी की बात लिखे होने का भी दावा किया। लेकिन घरवालों का दावा है कि उसने अपने जन्मदिन पर ही जान देने की तैयारी कर ली थी, लेकिन किसी वजह से ऐसा नही हो पाया फिर तीन दिन बाद उसने फांसी लगाकर जान दे दी।
पश्चिम बंगाल के जलपाई गुड़ी में कविता नामकी एक लड़की ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि उसे मोमो नाम के एक कॉलर ने फोन करके मोमो चैंलेंज में हिस्सा लेने के लिए उकसाया था। लेकिन इससे पहले कि वो मोमो चैंलेंज के जाल में फंसती उसने अपने भाई को पूरी बात बता दी। इसके बाद भाई ने तुरंत उस अनजान नंबर को मोबाइल से डिलीट किया और पुलिस से संपर्क साधा।
कविता को जिस नंबर से मोमो चैंलेंज में हिस्सा लेने के लिए कॉल आई थी, वो अमेरिका के अलबामा का है. न्यूज़18 इंडिया ने जब इस मोबाइल नंबर को सर्च किया तो ये नंबर मोमो नाम से दिखने लगा, जिसकी लोकेशन अमेरिका दिख रही थी। हैरत की बात ये है कि कविता को इस नंबर से कॉल तब आया जब उसने गुस्से में आकर फेसबुक पर लिख दिया कि वो मरना चाहती है. इसके बाद मोमो कॉल करके उसे गेम खेलने के लिए मजबूर करने लगा।
ये खेल काफी कुछ वैसा ही है, जैसे कुछ वक्त पहले ब्ल्यूवेल गेम आया था लेकिन इस बार मोमो चैलेंज का खतरा ज्यादा बड़ा इसलिए है, क्योंकि ये वाट्सएप के जरिए तेजी से फैल रहा है।मोमो चैलेंज का सबसे ज्यादा कहर अमेरिका, अर्जेंटीना, फ्रांस, मेक्सि को और जर्मनी में दिख रहा है. इनके अलावा दुनिया के कई देशों में मोमो चैलेंज को लेकर दहशत है। अभिभावकों को चिंता है कि कहीं उनका बच्चा इस जान लेवा गेम के चंगुल में ना फंस जाए। जानकारों के मुताबिक अगर मां-बाप अपने बच्चों पर नजर रखें तो उन्हें मोमो चैलेंज जैसे चक्रव्यूह में फंसने से रोक सकते हैं।
loading...